रेलवे स्टेशन, फुटपाथ, बस अड्डों पर पाए जाने अनाथ बच्चों को जब कोई भी सहारा नहीं होता तो तब शायद स्थानीय प्रशासन उन्हें अनाथ आश्रमों में छोड़ कर चले जाते हैं। लेकिन हमारे देश में कई ऐसे शहर हैं, जहां उन अनाथ बच्चों को अपना कहने वाला कोई नहीं है।
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