पिछले तीन दशकों में बांधों और जलाशयों का भारी विरोध किया जाता रहा। इन्हें नदियों के अस्तित्व और पर्यावरण को नुकसान का तर्क रखा गया। इस तरह के तर्क इतने जबर्दस्त तरीके से सामने आए कि सरकारें नए बांध और जलाशयों की बात करने से भी बचने लगीं। लेकिन अगर जल जीवन का पर्याय हो और जल भंडारण इतनी जरूरी चीज हो, तो क्या छोटे, मझोले और बड़े बांधों की जरूरत के बारे में नए सिरे से सोचना प्रासंगिक नहीं होगा?
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