Friday, 14 August 2020

दुनिया मेरे आगे: सपनों की जमीन

सवाल है कि क्या आजादी के दिन राष्ट्रध्वज फहरा लेने, गांधी, सुभाष, नेहरू और पटेल आदि स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों के चित्रों पर माल्यार्पण कर और लाउडस्पीकर के जरिए मुहल्ले में देशभक्ति गीत बजा लेने भर को ही सच्ची आजादी माना जा सकता है?

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