इतिहास गवाह है कि जन्माष्टमी के पर्व पर ब्रज के कण-कण में अपूर्व हर्षोल्लास छा जाता है। चौक पूरे जाते हैं। द्वार पर बंदरवारें बांधी जाती हैं। मंगल सूचक थापे लगाए जाते हैं और फूलों से पालने को सजाकर ब्रज की बालाएं गीत गाती हैं। घर-घर में भगवान को नए वस्त्र पहनाकर उनका शृंगार करके झांकियां सजाई जाती हंै।
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