रक्षा के बांधने को ही रक्षा-बंधन कहते हैं। पुराने जमाने में यह कार्य पुरोहित करते थे। वे ऋग्वेद के रक्षोघ्न-सूक्त से अपने यजमान के राखी बांधते थे। पर अब प्राय: सर्वत्र बहन ही भाई की कलाई पर राखी बांध देती है।
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