सावन महीने में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को सौ वर्ष की तपस्या के बाद देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने का वरदान प्राप्त किया था। इसी कारण इस व्रत को रखने से स्त्रियों को सुहाग और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन मां की पूजा करने के बाद उनकी आरती करना बेहद जरूरी होता है तभी पूजा संपन्न मानी जाती है।
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