Sunday, 26 July 2020

गोस्वामी तुलसीदास : माना सबने, सराहा सबने

हिंदी साहित्य का सबसे प्रामाणिक इतिहास लिखने वाले आचार्य रामचंद्र शुक्ल तुलसी के बारे में कहते हैं, ‘इनकी वाणी की पहुंच मनुष्य के सारे भावों-व्यवहारों तक है।

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