हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र विशु कार्तिक की राय में अहम यह नहीं कि कोई आदमी स्क्रीन देखने में कितना वक्त बिता रहा है। इसके बजाए किसी व्यक्ति की कुशलता पर इस बात का असर ज्यादा पड़ता है कि वह देख क्या रहा है और उसका संदर्भ क्या है। साफ है कि उत्पादक और अनुत्पादक स्क्रीन समय का अंतर करना मौजूदा दौर की एक बड़ी दरकार है।
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