Sunday, 12 July 2020

भाषाबोध: भय की कुंजी भाषा

यह बात सही नहीं है कि हमसे कोरोना महामारी का सामना करने में कोई चूक नहीं हुई। पर जिन चूकों पर सबसे कम ध्यान गया है, वे भाषागत हैं। दरअसल, जब पूर्णबंदी की घोषणा की गई तो पहले चरण तक ज्यादातर लोगों को यह समझ में ही नहीं आया था कि यह क्या बला है। जब देश में पूर्णबंदी लागू हुई तो तो हमने इस पूरी प्रक्रिया से अनभिज्ञ होने की वजह से इसे एक आपातकालीन घटना का नाम दे दिया और शब्द चल पड़ा- तालाबंदी।

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