Tuesday, 21 July 2020

विशेष: वंश का दंश

खरी-खरी: राजेश पायलट के बेटे सचिन पायलट, भूपिंदर सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र, जितेंद्र प्रसाद के बेटे जितिन, मुरली देवड़ा के बेटे मिलिंद, सुनील दत्त की बेटी प्रिया तो अशोक गहलोत, दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, प्रणब मुखर्जी के वारिसों के नाम सबसे पहले आते ही हैं। लेकिन स्थानीय स्तर पर जाएंगे तो विधायक से लेकर सरपंच तक की यही कहानी है। आपकी पार्टी का हाल यह है कि अगर कोई नेता बीमार पड़ गया तो उसके परिवार का ही कोई जगह भर पाएगा। किसी की सीट महिला के लिए आरक्षित हो जाए तो बीवी या बेटी के अलावा कोई और नाम सोचने की दरकार ही नहीं होती है।

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