कोरोना के बढ़ते रफ्तार को देखते हुए परीक्षा नहीं कराने की मांग फिलहाल व्यावहारिक और जायज भी है, लेकिन गंभीर मसला यह है कि परीक्षा न कराने की स्थिति में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पास विकल्प क्या है? बड़े स्तर पर मास प्रमोशन भी विद्यार्थियों के हित में नहीं है।
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