यह धरती के सबसे नजदीक 22-23 जुलाई को होगा। धूमकेतु भी सूरज का चक्कर काटते हैं, लेकिन वे चट्टानी नहीं होते बल्कि धूल और बर्फ से बने होते हैं। जब ये धूमकेतु सूरज की तरफ बढ़ते हैं तो इनकी बर्फ और धूल भाप में बदलते हैं, जो हमें पूंछ की तरह दिखता है। खास बात ये है कि धरती से दिखाई देने वाला धूमकेतु दरअसल हमसे बेहद दूर होता है।
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