Wednesday, 3 June 2020

दुनिया मेरे आगे: कागज का जीवन

अब एक तरफ कोविड-19 के भविष्य के बारे में अटकलें लगाई जा रही हैं, दूसरी तरफ जो पत्रिकाएं अपने डिजिटल संस्करण ले आ सकीं या लाने की सोच रही हैं, उन्हें अंगुलियों पर गिना जा सकता है। बाकी सब दम साध कर सोच रही हैं- ‘रहिमन चुप हो बैठिए, देख दिनन का फेर, जब नीके दिन आइहें बनत न लगिहे देर।’

from JansattaJansatta https://ift.tt/2MqD3oj
via

No comments:

Post a Comment