रबिंद्र नाथ टैगोर ने बांग्ला में लिखी कविता, ‘बंदी बीर’ में बंदा बैरागी की कुर्बानी को बहुत ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया है। वीर सावरकर की मराठी में लिखी कविता ‘अमर मृत’ की विषय वस्तु भी गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की कविता जैसी ही है जिसमें उन्होंने इस महायोद्धा की वीरता देशभक्ति और धर्म के प्रति निष्ठा का चित्रण किया है।
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