Sunday, 14 June 2020

विशेष: सहिष्णुता की जल समाधि

केरल जैसी कोई घटना होती है तो मनुष्य का सांस्कृतिक मन स्वाभाविक तौर पर विचलित होता है। लेकिन इसके साथ यह भी तथ्य है कि मनुष्य भी प्रकृति का ही हिस्सा है। जब उसके वजूद यानी जीवन जीने का मामला आता है तो वह प्रकृति से मिले स्वभाव के कारण हिंसक हो जाता है।

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