Tuesday, 16 June 2020

45 साल बाद…हिंसक झड़प, चीन ने फिर दिया भारत को धोखा

पुराने समय में, जब लेह और चीन के शिनजियांग में स्थित यारकंद और काशगर के बीच कारवां चलते थे तो वे सर्दियों में श्योक नदी के जमने के दौरान इसके किनारे पर यात्रा करते थे। कारवां लेह से निकल कर चांग ला दर्रे पर लद्दाख रेंज को पार कर, दरबुक पहुंचते, फिर श्योक गांव। वहां से श्योक नदी के साथ-साथ मुर्गो और थेंस पहुंचते। वहीं से डेपसांग मैदान, डीबीओ और काराकोरम दर्रे से गुजरते। इसी कारण इसे सर्दियों का रूट कहा जाता था।

from Jansattaराष्ट्रीय – Jansatta https://ift.tt/3elmLtr
via

No comments:

Post a Comment