संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत इन लोगों के जीवन के मौलिक अधिकार को खतरे में डाल दिया गया है। लेकिन जब जस्टिस लोकुर कहते हैं कि "सुप्रीम कोर्ट अपनी संवैधानिक भूमिका को पूरा नहीं कर रहा है" और "उसने प्रवासी मजदूरों और कामगारों को निराश कर दिया है", तो मैं यह पूछना चाहूंगा कि सुप्रीम कोर्ट इस स्थिति में क्या कर सकता है?
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