इन सभी रिक्शाचालकों ने यह उम्मीद छोड़ दी थी कि श्रमिक विशेष ट्रेनों में उन्हें सीट मिल पाएगी और वे घर पहुंच सकेंगे। इन 11 रिक्शा चालकों में से एक भरत कुमार ने बांगड़ा से पीटीआई-भाषा को फोन पर बताया, ‘‘25 मार्च को लॉकडाउन शुरू होने के बाद से हमारे पास कोई काम नहीं था और पैसा भी खत्म हो गया था।
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