मनोचिकित्सकों का कहना है कि इन स्थितियों से बचने के लिए बच्चों को उनके पसंदीदा कार्यों में व्यस्त रखा जाए। उनकी दिनचर्या में खेल, पढ़ाई, टीवी, बातचीत, योग, व्यायाम, घर के कार्यों में हाथ बंटाना आदि शामिल किया जाए। सबसे जरूरी है कि अभिभावक उन्हें वर्तमान स्थितियों को सकारात्मक रूप से देखने के लिए प्रेरित करें।
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