गुरु अर्जन देव जी के महान कार्यो में से एक प्रमुख कार्य गुरु ग्रंथ साहब जी की ‘आदि बीड़’ का संपादन है। गुरु अमर दास जी ने 1570 से 1572 के दो वर्षों में अपने पौत्र बाबा मोहन के बेटे सहंसर राम से, अब तक रची गई बाणी को दो सैंचियों (पुस्तकों) में पूरा करया था जिन्हें गोइंदवाल वाली सैंचियां कहा जाता है।
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