त्योहार चाहें कोई भी हो लेकिन कपड़े क्या पहनेंगे इसको लेकर असमंजस हफ्ते भर पहले से शुरू हो जाती है। फिर बात जब रंगों के त्योहार होली की आती है तब तो नए कपड़े पहनें या पुराने में ही होली मना लें, इस पर भारी विमर्श चलता रहता है। 21वीं सदी है तो त्योहारों में परिधान ट्रेंडी भी होने चाहिए तभी नयापन दिखेगा। तो ढेर सारे रंगों और खुशनुमा चेहरों के साथ होली फैशन के नए और पुराने अंदाज भी लेकर आई है। पुराने अंदाज पुराने होकर भी नए हैं, हमेशा नए रूप में सामने आ जाते हैं। हममें से कई लोग यह सोचते हैं कि अरे होली ही तो है, कुछ भी पहन लेंगे, जबकि सच तो यह है कि होली का एक नया बाजार हर साल सजता है और फिर बिक भी जाता है। उत्तर भारत के कई शहरों में रगों का यह त्योहार इतने व्यापक तौर पर मनाया जाता है कि डिजाइनर इसके लिए कुछ महीने पहले से ही तैयारी शुरू कर देते हैं। इनके डिजाइन पहले बड़ी दुकानों पर जाते हैं, फिर इनके डिजाइन की नकल शुरू हो जाती है। ये कॉपी वाले डिजाइन बाजार में दिखने शुरू हो जाते हैं। इन कॉपी वाले डिजाइन की खासियत यह है कि आम लोगों को डिजाइनर कपड़े मिल जाते हैं। होली पर परिधान चुनने की असमंजस और ट्रेंडी लुक्स के बारे में बता रही हैं स्मृति रानी।
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