गरीबी में जीवन-यापन करने वाले पिता यूरी व माता येलना ने सोचा भी नहीं होगा कि उनके घर में 19 अप्रैल,1987 को कदम रखने वाली परी एक दिन दुनिया के प्रतिष्ठित चारों ग्रैंडस्लेम के पांच खिताब अपने नाम करेगी। साथ ही नंबर एक टेनिस खिलाड़ी बनेगी।
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