बाजार के स्तर पर एक हुई दुनिया की गति कोरोना के विषाणु ने मंद कर दी तो अहसास हुआ कि पूंजी के वैश्वीकरण के साथ रोगाणु भी नत्थी होंगे। विषाणु का हमला और मानव जाति की यह लड़ाई नई नहीं है और जल्द ही हमारा समुदाय भी कोरोना के साथ दोस्ताना हो जाएगा। लेकिन तब तक ग्लोब की रुकी गति बता रही है कि अमेरिका के स्वास्थ्य क्षेत्र में मुनाफाखोरी का ढांचा कैसे नाकाम हो रहा है और अलग-थलग किए क्यूबा के आविष्कार में दुनिया उम्मीद देख रही है। स्वास्थ्य क्षेत्र में सार्वजनिक ढांचे को मजबूत किए बिना नए कोरोना की बात तो छोड़िए पुराने मलेरिया, डेंगू, निमोनिया और दिमागी बुखार से हुई मौतों को भी नहीं रोका जा सकता है। विषाणु वैश्विक हो या स्थानीय उससे लड़ने के लिए सबसे जरूरी है घर के पास एक अदद अस्पताल। घर में बंद इंसान बनाम वैश्विक विषाणु पर बेबाक बोल।
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