मोमताज ने लिखा है कि हम हमेशा से भारत को एक लोकतांत्रिक देश और जीवंत लोकतंत्र के रूप में देखते रहे हैं... संशोधित नागरिकता कानून के लागू किए जाने और नागरिकता पंजी की संभावना से हम भारत को नहीं समझ पा रहे हैं।
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