दुनिया की सारी भाग-दौड़ अपने परिवार और बच्चों के लिए होती है। तो फिर भला क्यों आज मुश्किल हो रहा है बच्चों को कुछ भी समझाना। बार-बार एक ही बात को समझाते रहना, संस्कारों की अहमियत बताते रहना। इसके बावजूद बच्चे हैं कि सुनते ही नहीं। कहां हो रही है कमी, क्या करें उपाय, जिससे जाना जाए बच्चों के मन की बात। बच्चों के इसी व्यवहार के बारे में बता रही हैं अनीता सहरावत।
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