इस छप्पन साल की उमर में भी उनकी आंखों में विशेष चमक थी, जैसे जता रही हो हमसे, ‘इंसान पैसे से नहीं, अपने व्यवहार से बड़ा होता है। अपने साथ-साथ अपनों और समाज के प्रति कर्तव्यनिष्ठा से बड़ा होता है, वही तो मैं कर रहीं हूं, तभी आज भी मैं सुंदर हूं, अन्य महिलाओं से विशेष हूं और प्रसन्न हूं।’
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