अब आस यही है कि पक्ष-विपक्ष इस मुद्दे पर सियासत करना छोड़ मंहगाई, गरीबी, प्रदूषण, भुखमरी, बेरोजगारी जैसी समस्याओं पर चर्चा कर उनका समाधान करें ताकि देश के विकास में भी हम विकसित देश का झंडा लहरा सके।
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